शनिवार, 19 दिसंबर 2009

आधुनिक अर्थशास्त्र का पिता





पाल एन्थनी सेमुएल्सन


(15 मई 191 से 13 दिसंबर 2009)



पाल ए सेमुएल्सन से मेरा परिचय अर्थशास्त्र के आम विद्यार्थियों की तरह स्नातक के पहले साल में आर्थिक सिद्धांत पर लिखी उनकी अतिप्रसिद्ध किताब ‘इकोनोमिक्स-ऐन इन्ट्रोडक्ट्री एनालिसिस‘ के माध्यम से हुआ था। 1948 के दौरान लिखी गयी यह किताब कीन्स की जेनेरल थियरी की ही तरह दुनिया भर के अर्थशास्त्र के विद्यार्थियों के लिये बेहद ज़रूरी किताब मानी जाती है। दरअसल दुनिया की चालीस भाषाओं में अनुदित उनकी यह किताब आधुनिक अर्थशास्त्र और विशेषकर कीन्सीय अर्थशास्त्र को समझने के लिये अद्वितीय किताब है जिसके बारे में एम आई टी में उनके सहयोगी जेम्स पोटेर्बा ने कहा था, ‘यह किताब एक शोधकर्ता और एक अध्यापक के रूप में और एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसने समकालीन अर्थशास्त्र के हर पहलू कि जिम्मेदारी ली, सैमुएल्सन की विरासत है।‘ समकालीन अकादमिक जगत में किसी कोर्स की किताब का यूं किंवदंती बन जाना एक आश्चर्य ही है।


सेमुएल्सन नवकीन्सवाद के प्रणेताओं में से एक थे और नवक्लासिकीय अर्थशास्त्र के विकास में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होने नवक्लासिकीय तथा नवकीन्सीय सिद्धांतों को आपस में जोडकर जिस सैद्धांतिक व्यव्स्था को जन्म दिया था उसे नवक्लासिकीय सिंथेसिस कहा जाता है। कहना न होगा की पूंजीवादी अर्थशास्त्र का वर्तमान परिदृश्य इसी सैद्धांतिक अवस्थिति से संचालित है। इसीलिये आर्थिक इतिहासकार रेन्डल ने उन्हें ‘आधुनिक अर्थशास्त्र का पिता‘ कहा था। उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित एक आलेख में अमर्त्य सेन ने उन्हें ‘आधुनिक अर्थशास्त्र का सृजनकर्ता और पद्धति निर्माता‘ कहा है।



वह पहले अर्थशास्त्री ने जिन्होंने आर्थिक विवेचनाओं में गणितीय तथा भौतिकी सूत्रों का व्यापक प्रयोग किया।इस पद्धति का प्रमुख इस्तेमाल उन्होंने अर्थव्यवस्था के गतिमान तथा स्थैतिक संतुलनों के समेकन से वास्तविक संतुलन की स्थितियों के लिये गणितीय माडल प्रस्तुत करने में किया। इस प्रणाली ने सामान्य संतुलन सिद्धांत के विकास में बहुमूल्य योगदान दिया। ‘उपभोक्ता वरीयता सिद्धांत‘ में उनके द्वारा प्रस्तावित ‘प्रकट वरीयता सिद्धांत‘, कल्याण अर्थशास्त्र में किसी आर्थिक निर्णय के सामाजिक कल्याण पर प्रभाव को नापने के लिये दिये गये उनके ‘लिन्ढाल-सेमुएल्सन-बावेन स्थितियों के सिद्धांत‘, लोक वित्त के क्षेत्र में लोक तथा निजी वस्तुओं के आदर्श निर्धारण के लिये प्रस्तुत माडल और अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र में उनके द्वारा विकसित दो ट्रेड माडल आधुनिक अर्थशास्त्र को दिये गये उनके तमाम अवदानों में सबसे उल्लेखनीय हैं। वह नोबल पुरस्कार पाने वाले पहले अमेरिकी अर्थशास्त्री थे 1970 में उन्हें सम्मानित करते हुए नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा था कि, ‘‘सैमुएल्सन का सबसे बडा अवदान यही है कि उन्होंने अपने किसी भी अन्य समकालीन अर्थशास्त्री की तुलना में आर्थिक विज्ञान के सामान्य विवेचनात्मक एवं विश्लेशणात्मक स्तर के उन्नयन में अधिक योगदान दिया है। उन्होंने वस्तुतः आर्थिक सिद्धांत के एक बडे हिस्से का पुनर्लेखन किया है।‘‘


दरअसल, महामंदी और समाजवादी ब्लाक के उभरने के साथ-साथ पूंजीवादी जगत में कीन्सीय सिद्धांतों के पूरी तरह अप्रभावी हो जाने चलते फैली निराशा और सैद्धांतिक शून्य के माहौल में सैमुएल्सन के गणितीय सिद्धांतो के जरिये प्रस्तुत माडलों और नवक्लासिकीय सिंथेसिस द्वारा राज्य के देखरेख में पूंजीपतियों द्वारा बाजार के खेल का प्रस्ताव पूंजीवाद के लिये संजीवनी जैसा था। यही वजह थी कि न सिर्फ उन्हें पूंजीवादी जगत द्वारा हाथोंहाथ लिया गया अपितु अमेरिकी व्यवस्था ने भी उन्हें भरपूर मान-सम्मान दिया। वह न केवल अमेरीकी वित्त मंत्रालय के महत्वपूर्ण पदों पर रहे अपितु जान एफ कैनेडी और जानसन के आर्थिक सलाहकार भी रहे। आर्थिक उदारीकरण का नया युग उनके सैद्धांतिक प्रस्ताव के अनुरुप ही था यही कारण है कि भारत में उदारीकरण की शुरुआत होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा था कि - चलो अन्ततः भारत ने भी आर्थिक संवृद्धि का रास्ता खोज लिया।

2 टिप्‍पणियां:

L.Goswami ने कहा…

जानकारी अच्छी लगी.

Randhir Singh Suman ने कहा…

nice